शीर्षक :मगही के मान रखs
नैय परोसs भौंडा गीत-गान, मगही के पवितर बनल रहे दs। रखs एकर मरजादा बना के, देवतन के भासा तो कहे दs।। गाबs खूबे जइसन भी गाबs, मगहिये में धूम मचावल जाइ। रखके धेयान बहू-बेटी के , मगही के इज्जत बढ़ाबल जाइ।। सुरलय फुटय कंठ से बड़ निम्मन, कइसनो राग तू छेड़इत रहs । करs मगही मईया के सेबा, एकर नइया तू खेबइत रहs।। जा के दिल्ली में कुछ दिन रहके, तेरे को मेरे को नैय करs। माटी के बानी बोलs सगरो, उहों पर मगही के जय जय करs।। माटी माय अउ मात भासा के, जरीको नै कहूँ उपहास करs। आदर जुकुर हे तीनों हमेसे, एकर उथान ल परयास करs।। होली चैता कजरी सोहर गा, मगही के मिठ रस घोरइत जा। छठ के गीत मगही काव्य लिख-लिख, सभे के मनमा झकझोरइत जा।। जइसे जेकरा बनो कूबत भर, मगही के गुन सभे गाबइत जा। नै लजाल करs मगही बोले में, सगरो एकरा फैलाबइत जा।। नरेन्द्र सिंह, अतरी, गया 08.04.2025
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