करs किसान के बेड़ा पार
धुक धुक मन करई की पड़तई अकाल हो, प्रभु नञ पड़ई पनिया,कर के छछकाल हो। फुहा फुहि बुना बुनी, पड़ई भोरे साम हो, ई इंदर रुंधले हथी किसनमा के काम हो। नञ खेत में हर चलई, न चलई फ़ार हो, गीला जमीन हय, तनिको न सुतार हो। करs उबेन या बरसs मुसलाधार हो, जेकरा से किसान के होवई बेड़ा पार हो।। नरेंद्र सिंह 05.07.2024
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