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आप खूब तरक्की कीजिए, खूब नाम और दौलत कमाइए, दुनिया जहां घूमिए, तमाम सुख सुविधाओं का उपयोग कीजिए, खूब बदलाव लाइए खूब परिवर्तन कीजिए, मगर कुछ बचा सके तो मुट्ठी भर ही सही अपने घर के आंगन में मिट्टी बचा लीजिए, अपना बचपना बचा लीजिए, मासूमियत बचा लीजिए । आटे में नमक जितना ही सही आंखों में दया और शर्म बचा लीजिए । फॉलोअर्स की इस खोखली दुनिया में चार पुराने दोस्त और एक प्रेमिका बचा लीजिए, पहला प्यार बचा लीजिए । मां बाप से प्रेम बचा लीजिए। मामा बुआ मौसी के बच्चों से रिश्ते बचा लीजिए । परिवार बचा लीजिए । आप सफलता के शिखर पर हो या हताशा के चरम पर तमाम उन जरूरी लोगों को बचा लीजिए जिनसे आपको उम्मीद हो कि वो आपको हर हाल में बचा लेंगे । यानी अपने आप को मुकम्मल बचा लीजिए ।
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