Real truth of marriage
आज के समाज की सच्चाई लड़की को चाहिए लड़के की नौकरी, जिसमें हो मोटी तनख्वाह की चमक, गाड़ी, बंगला और शोहरत की बातें, जो दिखाए सपनों की झलक। लड़के को चाहिए गोरी चमड़ी, जो हो सुंदरता की मिसाल, सिर्फ चेहरे पर ठहरती निगाहें, दिल की गहराई रहे बेहाल। दोनों के मापदंड अलग-अलग, आकांक्षाओं का खेल निराला, आदर्श खो गए रिश्तों के, हर बात में स्वार्थ का प्याला। प्यार हुआ अब व्यापार जैसा, जहां भाव-ताव चलती बातें, सादगी और सच्चाई गुम है, बस रह गईं ऊपरी मुलाक़ातें। क्या यह रिश्ता टिक पाएगा? जहां दिल से दिल का मेल नहीं, सिर्फ सतही चाहत की बुनियाद, जहां कोई गहराई का खेल नहीं। सोच बदलनी होगी सबकी, समाज को आईना दिखाना होगा, कद्र करें इंसानियत की, रिश्तों को सच्चा बनाना होगा। – शारदा गुप्ता
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