Raushni
तुम्हें क्या लगा था, मैं अंजान हूं तुम्हारे गहरे दबाये आसुओं से, जो अब सुख चुके हैं जो तुमने कभी बहाए ही नहीं, सबकी ढाल बनके खड़े रहे जो कभी दिखाए ही नहीं, मेहसूस भी नहीं किया क्योंकि तुम मजबूत थे, वो रोली के धागे जैसे जो बरगद पे लिपट लिपट कर अमर हो जाता है प्यार का मतलब ये नहीं कि तुम सिर्फ खिल खिला के हंस पाओ ,प्यार का मतलब ये भी है,, कि तुम खुद को आज़ाद छोड़ पाओ आंसुओं के साथ, डर के साथ, हंसी के साथ, निर्भयता के साथ खुद को जी पाओ जहां तुम्हें लगे कि तुम्हारा साया भी, तुम्हारा हाथ पकड़ के वही खड़ा है जहां दुनिया आगे निकल गई थी तुम्हें टूटा हुआ छोड़ कर पर एक शख़्स तुम्हारी ओर मुस्कुराता हुआ देखता रहा, जिसकी मुस्कुराहट की चमक ने अँधेरे कम कर दिये जिसके साथ अब आसमान में तारे तुम्हें वापस दिखते हैं हां चांद आने में वक्त लगेगा पर बस थोड़ी देर और रुकोगे तो सुबह का सूरज यहीं मिलेगा
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