Pyaar ki ankahi baatein✨
वो आज फिर रोता छोड़ गया, शायद फिर से फिक्र जताना भूल गया। कहता है मोहब्बत बेहिसाब करता है, पर हर बार मेरी चुप्पियों का मज़ाक बना जाता है। कभी मेरी आँखों का नम देख भी न सका, कभी मेरी थकान का वज़न समझ न सका। कहता है "तू ही सब कुछ है मेरी ज़िंदगी में," फिर क्यों मेरी तन्हाइयों से उसकी दोस्ती नहीं बन सकी? हर लड़ाई में मैं टूटी, हर बार मैं ही चुप हुई, वो चीखता रहा, मैं सिसकियों में घुटी रही। कहता है कि मेरा हक़ सबसे ऊपर है, पर जब भी भीड़ लगी, मेरा नाम सबसे नीचे था। वो फूल लाता है, कहानियाँ सुनाता है, पर मेरी खामोशी से नज़रें चुराता है। हर लम्हा जब मैं सिर्फ समझे जाने की आस में थी, वो अपने अहम की मीनारों में उलझा बैठा था कहीं। प्यार किया, पर क़द्र नहीं की, वक़्त दिया, पर महसूस नहीं किया। वो कहता है कि मैं उसकी आदत हूँ, मगर आदतों की जगह दिल में नहीं, दिनचर्या में होती है। मैं सोचती हूँ क्या इतना मुश्किल है किसी को सच्चे दिल से समझना? क्या प्यार बस कह देने से मुकम्मल हो जाता है…? वो आज फिर रोता छोड़ गया, शायद मेरी तकलीफ़ों का हिसाब देना भारी लग गया। कहता है प्यार करता है मुझसे बहुत, पर ना जाने क़द्र करना क्यों उससे कभी आया ही नहीं…
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