कैसी इंसानियत !?(pt.1 :पहलगाम)
इतना निर्दयी कैसे हो सकता है कोई इंसान ? एक बच्चे से बेरहमी छीन लिया तुमने उसका भगवन | "मुझे लगा कि वो मुस्लिम नहीं था इसिलए फायर कर दिया!" अरे, तुम जैसे दरिंदों को शांति से जीने का कोई हक़ नहीं है | अब तो यहाँ हवा में भी कुछ खौफ सा बसने लगा है, उस पेड़ की शाक पर बिखरा वो लहू ही क्यों महकता है | घर बोलके गए थे की वापिस आते है, लेकिन वो कफ़न में लौटकर क्यों आये है | उसकी ख़ामोशी अभी भी वहाँ चीख रही है, पुरे देश में सबकी आँखें अभी भी नम हैं | भला कोई इतना अत्याचार कैसे सेह सकता है ! लोगों को बोलने की अनुमति क्यों नहीं मिलती है ! रूह काँप उठी थी जब नाम पूछ के गोलियां चलायी गयी थी, अरे, अब अपने देश में ही घूमना क्या एक सज़ा बन चुकी थी | धर्म के आधार पर क्यों इंसानियत का बटवारा हो रहा है, जी हाँ, सिर्फ़ धर्म के आधार पर ही नहीं बल्कि उसे भी - जिसने इंसानियत के नाम पर दूसरों को बचाया, मारा गया है | इससे तो पूरी इंसानियत ही नष्ट हो गयी है, अब इस कलयुग में लोगों को शाँति मिलेगी कैसे ? ~ CHIHIRO </3
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