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उस दौर में फिर कभी लौट पाऊँगी क्या दोस्तों के साथ मस्ती भरे पल फिर बिता पाऊँगी क्या पापा के ज्ञान भरे भाषण सुनने के बाद भी देर तक सो पाऊँगी क्या तबियत खराब होने पर पापा अंकल और भाई को सिरहाने खड़ा पाऊँगी क्या भाईयों की कॉमेडी शो का हिस्सा फिर से बन पाऊँगी क्या पापा का मजबूत बेटा बनने के बाद वो नाजुक वाला अहसास भूल जाऊँगी क्या घर की लाडली बच्ची बना रखा था सबने वैसा बचपन जी पाऊँगी क्या सभी अपने दूर हो गये मुझसे अब अपने भेद सभी छुपा पाऊँगी क्या टूटी हूँ, संभली हूँ, फिर समेट चुकी हूँ खुद को फिर यादों को कभी भूल पाऊँगी क्या कुछ नये लोग है, कुछ नये रिश्तें हैं पर अपनों को याद ना आऊँगी क्या NAINSI तो मैं अब सुबह से शाम तक होती हूँ पर अब सबकों अपने ज़िद पर चलाने वाली KOMAL बन पाऊँगी क्या
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