pain
"निश्चलता का दर्द" बहुत रुलाया है मुझे, मेरी इस पगली निश्चलता ने, जो बिना किसी शिकायत के, सब कुछ सहती रही, हर दर्द को अपने भीतर दबाए रखा, और चुपचाप, अपनी आंसुओं की नदियाँ बहती रही। मेरी खामोशी ने हर किसी को बहलाया, लेकिन मेरी आत्मा के भीतर एक तूफ़ान सुलगता रहा, जो कभी किसी ने नहीं समझा, कभी किसी ने नहीं पूछा, क्योंकि मेरी चुप्पी को केवल कमजोरी समझा गया। मैंने जब कभी भी अपना दिल खोला, तो वही लोग, जो मेरे पास थे, मेरे जज़्बातों का मज़ाक उड़ाते रहे, और मुझे पगली समझते हुए, मेरे विश्वास को लहूलुहान कर दिया। मेरी निश्चलता ने मुझे इतना रुलाया, क्योंकि मैंने दूसरों के दुखों को अपना समझा, और अपनी भावनाओं को अंदर ही भीतर क़ैद रखा, लेकिन क्या तुम जानते हो? वही निश्चलता, वही खामोशी, अब मेरे अंदर एक बवंडर बन चुकी है। मैंने अपनी पीड़ा को न बोलकर छुपाया, लेकिन अब वो पीड़ा शब्दों से बाहर निकलने को बेकरार है, अब मैं जान चुकी हूँ, कि जब तुम खुद को खोकर दूसरों को देते हो, तब तुम अपना ही दिल खो बैठते हो। जो मुझे पगली समझते थे, अब उन्हें मेरी चुप्पी का सच दिखाऊँगी, मेरी निश्चलता ने मुझे यह सिखाया, कि कभी भी अपनी आवाज़ को दबाना नहीं चाहिए, क्योंकि आवाज़ के भीतर आत्मसम्मान और शक्ति है, जो दुनिया को बता देती है, कि तुम क्या हो और तुम क्या बन सकते हो।
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