Pagalpan
बेचैन राते भारी भारी दिल, जागी आँखे हर एक में पागलपन है! ये नन्हे सपने बोझ से लादे दिमाग में पनपने की हिम्मत बना ही लेते हैं। धूप का टुकड़ा अँधेरे सोए कमरे में उम्मीद की रोशनी जग कर लौट जाता है। सीलन की गंध याद दिलाती है कि हमारा यहां कोई नी, सिर्फ अकेलापन है। सपने, धूप, गंध इन सब में पागलपन है।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
