|| श्री महाकाल तांडव स्तुति ||
|| श्री महाकाल तांडव स्तुति ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || _____________________________ सदाशिव शंकर महेश्वर महेश, परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, भव-भय हरन भोलेनाथ, जय जय शिव शंकराय॥ प्रचंड-तांडव-नृत्य-रत, दिगंबर-विश्वरूपम्, शून्य-हृदय-निवासी, पूर्ण-ब्रह्म-अनुपमम्। अनादि-अनंत-कालचक्र-अधिपति, महादेव-महंतम्, क्षण-भंगुर-लीलाधारी, विभु-अविनाशी-अनंतम्॥ जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, शीश-शशांक-धवल-दीप्ति, अमृत-रस-झरी। व्याल-कराल-माल-कंठ, भस्म-विलेपन-धारी, वैराग्य-पुंज-महायोगी, त्रिपुर-अरि-विनाशकारी॥ त्रिशूल-धारिणी-शक्ति, न्याय-वज्र-प्रहारम्, डमरू-नाद-गुंजित-ब्रह्मांड, सृजन-स्वर-सारम्। महानाश-कुक्षि-स्थित, नूतन-सृष्टि-विधानम्, रुद्र-भीषण-संहार, शिव-सौम्य-निर्माणम्॥ काल-काल-महाकाल, काल-जयी-अनामी, चराचर-जगत-रक्षक, विश्वेश्वर-स्वामी। करुणा-पारावार-शंभू, तारन-तरन-हारी, शरण्य-चरण-कमल-अर्पित, जय-जय-पुरारी॥ ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, हर हर महादेव, जय शिव शंकराय॥ _____________________________ ✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📧 ई-मेल -- bk10mishra@gmail.com Bal Krishna Mishra 🙏 # Spiritual
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