जिक्र ||
तुम मुझे एक दिन खो दोगे, जब सूरज डूबेगा चुपके से, जब हवा में हल्की सी उदासी होगी, और चाँद की रौशनी थकी सी होगी। तुम मुझे एक दिन खो दोगे, जैसे बिछड़ते हैं रास्ते, जैसे तितली का उड़ जाना, जब दिन ढल जाए। तुम मुझे एक दिन खो दोगे, न ग़ुस्से में, न तकलीफ में, पर जैसे एक ख्वाब टूटता है, जब कोई याद छूटती है। तुम मुझे एक दिन खो दोगे, लेकिन मैं दूर नहीं जाऊँगा, तुम्हारी यादों में, तुम्हारे ख्यालों में, साथ ही रहूँगा, साए की तरह। तुम मुझे एक दिन खो दोगे, पर यह सच्चाई कभी न बदलेगी, हमेशा तुम मेरे पास रहोगे, जब तक मैं तुम्हारी धड़कन में जिंदा रहूँगा। ...
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