मैं वरदान माँगूँगा नहीं|
मैं वरदान माँगूँगा नहीं, चाहे राहों में काँटे बिछा दो, तूफानों से खेलूंगा मैं, आँधियों से राहें सजा लो। हाथ जोड़कर झुकना मेरा स्वभाव नहीं, कर्मभूमि में तप करना ही मेरा धर्म सही। विजय का मंत्र मैं ही रचूंगा, अपनी तकदीर खुद ही बुनूंगा। आसानियाँ नहीं, कठिनाइयाँ दे दो, जीवन की रणभूमि में, शौर्य का परिचय दे दो। मैं तपस्वी, मैं योध्दा, मैं स्वाभिमान हूँ, वरदान नहीं, अपना स्वाभाविक अधिकार हूँ। मैं झुकूँगा नहीं, टूटूँगा नहीं, स्वयं से ही अपना युद्ध लडूँगा सही। जो भी मिलना है, कर्म से मिल जाएगा, वरदान माँगने का विचार भी मिट जाएगा। मैं हिमालय हूँ, अडिग रहूँगा, सागर की तरह, गहराइयों में चलूँगा। अपनी मंज़िल खुद बना लूँगा, वरदान माँगूगा नहीं, खुद जी-जान लगा दूँगा। — रवि कुमार सरोज (Ra.One)
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