मैं खुद की फेवरेट हूं|
शीर्षक: मैं खुद की फेवरेट हूं ---------------✍️✍️-------------- करने बैठोगे अगर मेरी छवि का गुणगान तो पाओगे मेरी अंतर्निहित भावनाओं और कमियों का नव उत्थान सभी गुणों और कुछ कमियों को साथ लेकर चलती हुई एक प्यारी सी नाजुक दिल की मूर्त हूं लेकिन हां में खुद की फेवरेट हूं । मेरे दिल में छिपे हैं अनमोल से सपने उनको पूरा करने की आरजू लिए बस कर्म को अविरल करती हूं। नहीं देख पाती किसी को दुःखी निर्मल सी भावना के साथ बस उनकी सहायता कर के दिल को तसल्ली दिलाती हूं। माना की कमियां भी निहित है थोड़ी गर उनको दूर करने की कोशिश हजार बार करती हूं। अहंकार, द्वेष को स्वयं से परे रखते हुए सभी को अपने समान ही दर्जा देते हुए बस निरंतर सामाजिक बंधन में रहती हु हां मैं अपनी फेवरेट हूं। कभी किसी मार्ग पर विचरण करते हुए जब किसी अपने से सामना हो जाए तो एक झलक बस मुस्कुराकर अभिवादन सा करती हूं । करते होंगे सभी दूसरे लोगों की अच्छाइयों का बखान में स्वयं को ही अपना समझती हुई ,अपनी अंतर्निहित शक्तियों पर मनन नित्य करती हूं। मेरी खुशियों का रहस्य तो मेरा आचरण ही तो है कभी खुद को व्यथित और उदास जो पाऊं तो अपनी कमी का सोचकर आगे सब अच्छा करने की ठान लेती हूं । इन सभी बातों को साथ लेकर चलते हुए गर्व से कहूंगी की हां मैं खुद की फेवरेट हूं। लेखिका :स्वाति सोनी स्वाति की कलम से ✍️
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