NaNa jii
हर सुबह की पहली किरण में, आपकी मुस्कान मिलती है, आपके साथ होने से ये जिन्दगी चलती है! वर्दी पहने जब आप चलते थे गर्व से, हर कदम पर झलकती थी देशभक्ति की शान। धूप-छांव से लड़ते हुए, सिखाया आपने कैसे बनते हैं इंसान। आपका प्यार, आपकी सीख, हर मोड़ पर साथ है - एक मजबूत दीवार की तरह। आपने न कभी थकना सिखाया न हालातों से डरना सिखाया। बचपन से देखा उन्हें, कुछ कहते कम थे, मगर हर खामोशी में हज़ार किस्से गुम थे। जिन हालातो से कोई टूट जाता, वो मुस्कुरा कर और मज़बूत बन जाते! वो चिल्लाते है डॉटते हैं, कभी-कभी तो आँखों मे गुस्सा लिए उठ जाते हैं। पर मैं जानता हूँ, वो गुस्सा नहीं वो प्यार है- जो उनके शब्दों में नहीं, आदतों में बसा है। उन्होंने कभी शिकायत नहीं की ना वक्त से, ना हालात से। जिसे दुनिया संघर्ष कहती है, वो उसे सिर्फ "कर्म" मानते रहे पैरों में छाले थे, मगर छुपा लिए जूतों के नीचे ! सीने में दर्द था, मगर मुस्कान ओढ़ ली चेहरे पे। जब भी पूछा -"सब ठीक है ?" तो बोले -"tum sub theek हो बस वही काफ़ी है।" कैसे कहूँ की वो बस नाना जी हैं? वो तो hmari जिंदगी का सबसे मजबूत हिस्सा हैं। वो जो सरहदों पर डटे रहे, जिन्होंने दुश्मन से जयादा वक्त से लड़ाई लडी। जो अपनों के लिए जिए, पर कभी खुद के लिए कुछ नहीं मांगा!
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