Meri priye
वो रुख़सार वो चक्ष वो कानों से लहराती बालियाँ वो माथे को चूमती ज़ुल्फ़ें जिन्हें तेरी उँगलियाँ सँवार रही हैं इन फ़सानों ने फ़क़त नींद छीन ली है मेरी !! चाँद भी बादलों के पीछे छुपता है तुझे देख कर, उसे भी अपनी चाँदनी पर ग़ुरूर थोड़ा कम है और यहाँ मैं करवटें बदल रहा हूँ क्योंकि आँखों में नींद नहीं सिर्फ तेरा ही मौसम है
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