mera pahad
सड़क नहीं मेरे गांव में चलने को सीधी खड़ी चढ़ाई है बच्चे बूढ़े और औरतों कि ये हर रोज की लड़ाई है! स्कूल है बड़े दूर यहां बड़े दूर से बच्चे आते हैं! मगर शिक्षकों के अभाव में यहां ; आधे स्कूल भी खंडहर नजर आते हैं! सरकारी अस्पतालो के नाम पर यहां बिल्डिंगे ही नजर आती है बीमारी चाहे कोई भी हो आपको? दवाई के नाम पर बस पेरासिटामोल पकड़ा दी जाती है। गंभीर समस्या आने पर सबको शहरो की आस नजर आती है नेता भी यहां आते हैं वोट मांगने हाथ जोड़कर रोजगार के नाम पर बस झूठे वादे कर जाते हैं और जीतते ही सबको ठेंगा दिखाकर चले जाते हैं! लड़कियों को शादी यहाँ सरकारी लड़के से ही करनी होती है लड़के तो नहीं मांगते दहेज वैसे मेरे पहाड़ मे किसी से मगर बदले में लड़की हल्द्वानी में घर होने का डिमांड करती है! और रहना तो होता है इनको शहरों में मगर insta reels में पूरा पहाड़न होने का दिखावा करती है।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
