🌸स्त्री और भौतिकी ♥️
स्त्री है गुरुत्वाकर्षण , सबको अपनी ओर बुलाए । उसकी मौजूदगी से ही , संबंधों के ग्रह चमक पाए । वह है सापेक्षता का नियम, समय परिस्थिति संग बदल जाए । उसकी दृष्टि के स्पर्श से ही, हर समीकरण हल हो जाए। कभी क्वांटम सी रहस्यमई , संभावनाओं से भरी हुई । कभी प्रकाश की किरण बने , अंधियारे राहों को चीर गई । ऊर्जा के नियम सा उसका, बल कभी न घटने पाता । रूप बदलकर हर युग में वो, नव इतिहास रचती जाती । स्त्री है ब्रह्मांड स्वयं ही, जिसे न अब तक मापा गया । उसकी गहराई में सदा , जीवन का सत्य छापा गया। ~मुसाफिर ✍️
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
