...kuch sabd...
समय पूरा बीत गया कुछ पता ना चला अब इस माहौल में कैसे जाए ढला आती हे मां की याद , कैसे में बताऊं । अब ना हे कोई बहन जिसको में सताऊं ।। अब ना हे पिता जैसा कोई जो मुझे ध्यान से सुनेगा , अब मां जैसा भी नही कोई यहा जो मुझे सोने को कहेगा । ना हे कोई ताऊजी सा यहाँ जो शांत कराएगा , मुझे रोने से रोक पाएगा ना हे कोई बाबा जी सा यहां जो मुझे लाकर चॉकलेट खिलाएगा केसा हो रखा ही जीवन कैसे ये बीत पाएगा क्या अब कोई मेरा मारदर्शन कराएगा ......
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