kuch batain
कभी-कभी तुमसे बात करते हुए अचानक चुप हो जाता हूँ— इसलिए नहीं कि कुछ कहने को नहीं होता, बल्कि इसलिए कि जो महसूस कर रहा होता हूँ, उसे शब्दों में ठीक से रख नहीं पाता। और फिर तुम पूछती हो— "क्या हुआ ?" मैं हर बार बस इतना ही कहता हूँ— "कुछ नहीं.." कुछ बातें कह देने से छोटी लगने लगती हैं, इसलिए उन्हें ठीक लगता है।
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