kitne Armaan
कितने अरमां हैं मेरे बता दूँ अगर तुम लगा कर ज़माने को ठोकर फिर दिल-ए-बेताब की ख़ातिर हवाओं को बना कर हम-सफ़र यार कभी इधर तो कभी उधर दिल में जगा कर वस्ल की हसरत हाथों में उठा कर चराग़े-मुहब्बत अपनी नीली आंखों को करके तर ढूंढ़ोगी फिर मुझे हद से बढ़ कर ✨️✍️👀
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