Khwab
सच में ख़्वाब ही तो हो तुम... अचानक से मेरी ज़िंदगी में आए और ज़िंदगी ठहर गयी तुम पर... ऐसा लगा अब न तो किसी की तमन्ना रही न तलाश, न प्रतीक्षा रही न आस... ✍✍✍ Sanam
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
सच में ख़्वाब ही तो हो तुम... अचानक से मेरी ज़िंदगी में आए और ज़िंदगी ठहर गयी तुम पर... ऐसा लगा अब न तो किसी की तमन्ना रही न तलाश, न प्रतीक्षा रही न आस... ✍✍✍ Sanam
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets