Janmashtami Specials
जीवन की महिमा हमको मुरली की धुनों में सुनाते रहे हो । सभ्य समाज बने इस हेतु स-कारण चीर चुराते रहे हो । गौ-कुल के हित साधन को खुद माखन चोर कहाते रहे हो ।। माखन से मख सिद्ध किया नवनीत का स्वाद चखाया हमें ।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
