Jai jagannath
जय जगन्नाथ पुरी की रेत पे गूंजे तेरा नाम, सागर भी करता तेरा गुणगान। रथ खींचते हैं हाथों में विश्वास, हर दिल में जगता तेरा प्रकाश। काली सूरत, विशाल तेरी आंखें, जैसे ब्रह्मांड समाया तेरे पाँव में। बहन सुभद्रा, भाई बलभद्र संग, तेरी महिमा करे जग में रंग। सुख में, दुख में, बस तू ही साथ, तेरे दर पे मिटते हैं सब आघात। न कोई छोटा, न कोई बड़ा, सब पे बरसे तेरी कृपा सदा। हे नीलमाधव, हे जग के नाथ, तेरे बिना अधूरा हर एक प्रभात। हर सांस बोले, हर मन गाए, जय जगन्नाथ! जय जगन्नाथ! @atul khandelwal
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