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नसीब को न कोई करार मिला, मोहब्बत में बस इंतज़ार मिला। तेरी यादों ने हर राह वीरान किया, सफ़र में न मंज़िल, न किनार मिला। जिस दिल ने तुझको ख़ुदा सा पूजा, उसी को तन्हाई का मजार मिला। हर चाहत अधूरी, हर सुकून बिखरा, दिल को ग़म के सिवा न कोई उपहार मिला। ग़म को मोती बना कर कह रहा है सदफ़, मोहब्बत में हर शख़्स को बस नुकसान मिला।
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