₹$₹ बरसात में कच्चे घर ₹$₹
₹$₹💓💖 बात कुछ वक्त पहले जब कहने को झोपड़ी और कच्चे घर जो बरसात में टपकने और तेज हवाओं संग बारिश में कभी - कभी ढह जाया करते थे..!! तब इन्सान के इरादे नेक मजबूत और हर परिस्थिति का सामना करने को सब तैयार रहते भागते नही थे..!! आजकल का इन्सान परिस्थितियों को जान लिया तो इरादे कमजोर और सब कुछ समेट कर वहां से भागने की तैयारी कर लेता है..!! धरती वही लेकिन समयानुसार बहुत बदलाव - समय वही एक जैसा शायद इन्सान की सोच अब बदल कुछ ज्यादा स्वार्थी स्वभाव हो गया है.!! प्रकृति भी इन्सान का रूप - स्वरूप जान कर अपना व्यवहार भी बदल लिया है...💓💖..!! ©₹$₹ @mit ₹$₹
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
