har kisi ke bas ki bat nhi
"मेरा जीवन: एक अनकही दास्तान" मेरा जीवन… न कोई सुहानी धुन है, न किसी सुकून भरे सवेरे का वादा। यह एक अनंत अंधेरी रात है, जहाँ हर तारे की रोशनी भी एक छलावा है। हर कदम, एक जख्म की गवाही देता है, हर सांस, एक नयी परीक्षा होती है। मैंने चाहा था सिर्फ जीना, पर यहाँ तो हर पल खुद को साबित करना पड़ता है। यह जीवन, जैसे पत्थरों पर रेंगती हुई प्यास हो, हर बूंद के लिए अपने हिस्से का खून बहाना हो। तुम जो मुझे दूर से देखते हो, शायद सोचते हो, "क्या मुश्किल है इसमें?" पर क्या तुमने देखा है, कैसे हर मुस्कान के नीचे आँसू की नदियाँ बहती हैं? कैसे हर जीत की गूँज, हार के अनगिनत सन्नाटों से उठती है? मैंने अपने सपनों को मरते देखा है, उनकी राख को अपने हाथों में समेटा है। मैंने अपने अपनों को दूर जाते देखा है, और उनके बिना खुद को बिखरते पाया है। यह जीवन, जैसे एक मोमबत्ती हो, जो हर पल खुद को जलाकर किसी और को रौशन करती है। तुम कहते हो, "जीना तो आसान है।" पर क्या तुमने उस आग में चलना सीखा है, जिसने मुझे हर रोज खाक किया है? क्या तुमने उस बोझ को उठाया है, जो मेरी हर सांस को भारी बनाता है? मेरा जीवन कोई सरल धारा नहीं, यह वो तूफान है, जो हर किनारे को ललकारता है। हर रिश्ता यहाँ एक इम्तिहान है, हर चाहत एक दर्द का पैगाम। जो इसे जीना चाहता है, उसे पहले टूटना पड़ेगा, हर टुकड़े को खुद जोड़ना पड़ेगा। मेरा जीवन, एक कच्ची मिट्टी है, जो हर आघात पर
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