Ghazal by Devansh Ujwall
जैसे जैसे मुझे याद आता गया। वैसे वैसे मुझे वो भुलाता गया।। ऐसे आया कि मुझमें समाता गया, मेरा सब कुछ वो अपना बनाता गया।। मेने सोचा कि क्या झूट बोलूं उसे , जाते जाते वो मुझको रुलाता गया। मैंने पलकों से काँटे चुने राह के वो मुझे फिर भी क्यों आजमाता रहा। हँस रहा है मेरी प्यास पर आज वो, जाम दर जाम जो कल पिलाता गया। हाथ देकर वो मुझको उठाता है अब, कल जो नज़रों से मुझको गिराता गया। देवांश उज्जवल
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