for my kaju
नायब है तू किसी मोती की तरह में मामूली सा पत्थर हुं तू शांत किसी नदी की तरह में उफनता हुआ समंदर हुं तू है खुशबू गुलाब सी कोमल कली आबाद सी में कांटो वाला मंजर हु अब शब्द नहीं है तेरे लिए कुछ भी बसा रखा तुझे में अपने अंदर हु नायाब है तू किसी मोती की तरह में मामूली सा पत्थर हुं ❤️🤗
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