For Anti ragging
मै उत्साह से आया, कॉलेज की चौखट पर, मन में उमंग और आत्मविश्वास का समंदर, दुनिया को बदल देने का सपना था आंखों में, कुछ जिम्मेदारियों का बोझ था बाहों में, इस कली में ताकत इतनी की जगमगाता फूल बनके रोशन करदे बगिया सारी, इस चिराग़ में इतनी चमक थी, की देखकर कर शर्मा जाता आफताब भी। पर कुछ कमियां भी थी मुझमें, जो उत्साह ने छिपाई थी दिल में, कॉलेज आते ही कमियों ने दी थी दस्तक, उस उमंग को अंधकार ने किया था ध्वस्थ, सीनियर की "so-called" interaction ने उस उमंग को जमीन में पटक दिया। उस अंधकार के चार बाई चार के कमरे में , मैंने अपने आप को समेट लिया, अपनी मन की व्यथा को अपने मन दफनाने लगा , कभी पंखे और रस्सी की बात भी सुनने लगा , कलि जो थी पहले अब मुरझा के गिर गई कही, २ चिराग़ का तेल कॉलेज की हवा में उड़ गया कही, अब वो चिराग अंधकार से डरने लगा, वो इंसान तो अब खुद को धिक्कारने लगा। २ पर आज ये दिन है की सबको याद दिलाए, कि रैगिंग के अंधकार को मिलके साथ भगाए, नई सोच के साथ नए सपने अब सजाए, कॉलेज की आंगन में फिर्से फूल खिलाए। २ उत्कर्ष केशवानी
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