Ek Kahani
जिंदगी कुछ इस दरमियां ले गई जिनके हाथों को कसके थामा था वह यूं छूट जाएगी सोचा ना था कभी रोता नहीं देखा जिसको आज वह मेरे जाने से ही रोएंगे जिसके आँगन में मैं बड़ी हुई आज उसका ही दामन छूट जाएंगे जिस मां के लिए मैं हर वक्त खड़ी हुई आज उसको ही रुला कर जाउंगी जिस भाई से रिमोट के लिए लड़ी आज पूरा घर उसके नाम कर जाऊंगी मैंने सोचा ना था मैं इस कदर रोउंगी लाल कपड़े में लिपट कर अपनी सारी खुशियाँ छोड़ जाऊँगी जो खुद से पानी भी नहीं लेती थी अब वह पूरे घर को संभालेगी मैंने सोचा भी ना था मेरी जिंदगी यूं बदल जायेगी
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