$₹$ मां का प्यार $₹$
$$💕💞💖 मां तो मां होती क्या धरती क्या मंदिर लोगों के सोच अनुसार सब स्थान पर अच्छी लगती हैं..!! कष्ट कितना भी लेकिन उसकी ममता और जिम्मेदारियां उसे धरती पर ही रखती है..!! अपनों से तिरस्कृत होती बार-बार , फिर भी अपने ममता के हाथ मजबूर है..!! गलती अपनो कि ना देख खुद में कमी बताकर अपनी गलती मानती है..!! मां जैसी ना कोई दुजा यह समझ बहुत देर में अपनों को आती है..!! कमी का एहसास जब होता तब - तक मां बहुत दूर चली जाती है..!! मां धरती पर ईश्वर तुल्य है..!! लेकिन यह मानने में इन्सान बहुत समय या शायद पूरी उम्र लगा देता है..!! ऊपर आसमान से ईश्वर सृष्टि संचालित करता है..!! नीचे धरती पर ईश्वर तुल्य मां सृष्टि संचालित करती है..!! क्षमा, दयाभाव की दोनों एक ही मूरत समझ इन्सान कि अन्तर चेहरे से करता है..!! धरती पर मां ईश्वर कि छाया होती है..!! इन्सान उसे छल और माया कहता है..💖💞!! $$ @mit $$
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