$₹$ अनजान से पहचान तक $₹$
$$💕💞❤️ अजनबी तो अजनबी ठहरें जब तक समझ ना पाए , तब - तक अनजान होते है..!! कुछ समझ में आ जाए , थोड़ी बहुत बेचैनी समां जाएं मन मे तब एक सवाल और पहचान होते हैं...!! अजनबी के लिए क्या दिन - दोपहर - शाम तब - तक - सब वक्त समान्य होते हैं..!! अजनबी जब दिल के करीब आने लगे तब थोडा दिल परेशान झिझक महसूस पहचान होने लगते है..!! अब दिन - दोपहर - शाम कुछ खास थोड़ी पहचान और बेचैनी सामान्य नहीं होते है..!! तन - मन में उसके प्यार की तड़प उमड़ती है..!! अब दूरी समझ नही आती है..!! मिलने को मन और बातें करने को हजारों होती है..!! अजनबी अब अनजान नहीं लगता जन्मों की पहचान होती है.. ❤️💞💕.!! $$ @mit $$ © $₹$ @mitgorakhpuri $₹$
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