$$ इन्सान का धर्म - कर्म $$
$$💕♥️ इन्सान के मजहब और धर्म की कोई बोली नहीं होती है..!! एक आस्था का बस सैलाब समझ आ जाए तो समुद्र सी गहरी होती है..!! इन्सान वही अच्छा - सच्चा जो धर्म मजहब से ऊपर इंसानियत की समझ रखता है..!! कभी -- कभी मोल इन्सान कि कम , बोली कि ज़्यादा और धर्म - मजहब की बहुत ज्यादा होती है..💕♥️..!! $$ @mit $$
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