Dil ki dhadhkan
**दिल धड़कने लगा फिर आज ज़ोर से,** **कुछ हलचल हुई है कल रात के शोर से।** चाँदनी भी थी कुछ अजीब सी खामोश, जैसे कोई राज़ छिपा हो उस भोर से। हवाओं में घुली थी कोई अनकही बात, हर साया कह रहा था कोई है मेरे साथ। नींदें भी आँखों से रूठी-रूठी थीं, सपनों में दिखी तेरी हल्की सी सौगात। तेरे नाम की गूँज थी दिल के हर कोने में, एक आग सी जल उठी सीने के उस कोने में। हर धड़कन में तू, हर सांस में तेरा असर, कहाँ से आ गया तू फिर इस मौसम के बहकने में? शायद रूह ने तुझे फिर से पुकारा है, या तेरा साया चुपके से लौट आया है। जो बीत गया था, वो फिर जी उठा है, दिल आज फिर से उसी मोड़ पे लाया है। अगर आप चाहें, तो इसमें और भी बंध (छंद) जोड़ सकता हूँ या इसे किसी खास मूड जैसे इश्क़, विरह, आध्यात्म या उमंग में ढाल सकता हूँ। बताइए कैसी भावना चाहिए?
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