deshbhakti
मै अपने लहजे मे कुछ नज्म लिखू, लिखू कुछ उन सियासती लुटेरों पे, जो मेरी भारत माँ को हि बेच रहे , ओर क्या लिखू उन गंदगी के ढेरों पे।। mahesh gajipura
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