Coincidence
कभी सोचा नहीं था पहाड़ों की वादियों से कोई इतना खास मिल जाएगा, कुछ बातें हुईं… पर दिल को अपनापन सा मिल जाएगा। अगर मेरी बातों में थोड़ी सी शरारत ज्यादा हो गई हो, तो उसे मेरी बदतमीज़ी नहीं… बस तुम्हें मुस्कुराने की कोशिश समझना। सच कहूं, तुम्हारी सादगी, तुम्हारा स्वभाव, और वो शांत मुस्कान — मुझे खुद के होने का एहसास दे गई। अगर बुरा लगा हो तो माफ़ कर देना, इरादा गलत नहीं था… बस तुम्हें थोड़ा और जानने का मन था ।
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