तुम चले जाना By प्रशांत
मेरी रूखी सी सांसों में खुशबू का जो जादुई तड़का तुमने लगाया, वो पहली बार तुम्हारे मुख से मेरा नाम पुकारना आज भी मेरे अंदर समाया, तुम्हारी उस धीमी सी प्यार भरी आवाज में थी शहद सी मिठास, मेरा दिल और उसकी धड़कने तबसे ठहर गईं हैं तुम्हारे पास। मेरी सारी कविताओं से आती है मीठी सी खुशबू तुम्हारी, अभिमान हो गया इन्हें जबसे करता हूं मैं इनसे बातें तुम्हारी। उसकी परछाईं से भी नूर की बरसात होती है, हवाएं महक जाती हैं जब उसकी बात होती है, उसके बोलने भर से फूल खिल उठते हैं, उसके उफ्फ करने भर से बरसात होती है। उसकी एक झलक में है रब की कारीगरी, उसकी मुस्कान से होती है सुकून की तस्करी, उसके रोने से बिगड़ जातीं हैं शक्तियां ईश्वरी, उसकी परछाईं से मिलती है दिल के सुकून की मशीनरी। ये थी महज मेरी कल्पनाएं। कभी अगर मन में ख्याल आए मुझसे दूर जाने का तो बेशक चले जाना, दूरियों को मुकम्मल रख तुम मेरे प्यार के रास्ते से चले जाना। याद आयेंगे ये तुम्हें मेरे साथ बीते दिन, ये महज मेरी कल्पनाएं हैं तुम मेरी बातों में मत आना, तुम चले जाना।
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