तुम ओर तुम्हारी महक By प्रशांत
उसके सामने बोल नहीं पाता, उसे शायद मेरा इशारा भी समझ नहीं आता। वो न दिखें जिस दिन वो दिन नहीं गुजरता, किसी ओर के लिए ये दिल इतना कभी नहीं मारता। उसकी आँखें इतनी खूबसूरत हैं कि उनकी आंखों में डूब जाने को दिल करता है, अगर डूब गए तो निकलना मुश्किल है। वर्षों गुजार दिए उसके बिना, गनीमत देखो अब एक दिन नहीं गुजारना मुश्किल है। तुम्हें पाने की हर मुमकिन कोशिश होगी, अगर न मिले तुम तो गुजारा मुश्किल है। हम लाएंगे किसी दिन मोहब्बत अपनी हथेली पर रख के, समझ पाओ तो समझ जाना, न समझे तो मिल पाना मुश्किल है। जहां रहती थी तुम वो जगह अब भी महकती है, कोयल बार बार आके उसी जगह चहकती है। जिस चीज को तुमने छुआ मेरे हाथ से वो मैली हो गई, तुमसे बोलता हूं तो ऐसा लगता है के सारी बातें पहेली हो गईं। इंतजार में तुम्हारे ये गलियां सूनी पड़ी हैं, तुम आते हो तो ये घड़ी भागती बहुत है। समझाओ इसे अपनों के साथ वक्त के मायने क्या होते है, गुजरता वक्त है पर खर्च हम होते है।
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