तुम और तुमसे इश्क By प्रशांत
तुम वो हो जिसे मुझे याद करना नहीं पड़ता, तुम वो हो जिसके बिना मुझे चैन भी नहीं पड़ता, तुम हो मेरे सबसे खूबसूरत एहसासों में से, जिसे देखकर मुझे किसी और को देखना नहीं पड़ता। तुम्हारा अहसास इतना खूबसूरत है कि मैं हर वक्त बस इसी में गुम रहना चाहता हूं, तुम अच्छे पलों को अपने मन से जियो पर दुख में तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं। जिंदगी के इस उतार-चढ़ाव में तुम्हारा साथ होना मेरे लिए किसी स्वप्न से कम नहीं, कैसे न मोहब्बत होती तुमसे, इतना सुंदर अहसास है तुम्हारा जो कोहिनूर की चमक से कम नहीं। तुम्हारे दीदार से मिलने वाले सुकून को मैं कैसे जाहिर करूं, तुम और तुम्हारा चरित्र इतना सुंदर है के इसपर मैं कबतक न मरूं। पता नहीं मैने कितनी दुनिया देखी है, पर अब तुम्हारे बाद किसी और को देखने का मन नहीं करता, साधारण सी जिंदगी, अनगिनत सपने और साथ तुम्हारा अब कुछ दिल फरमाइश नहीं करता। तुम जहां रहते थे वो स्थान इतना प्रिय है मुझे कि उसमें मैं अपना सारा जीवन गुजार दूं, तुम कमियां बताती हो खुद में, आना कभी मेरे पास तब देखना उन कमियों में खूबियां कैसे निकाल दूं।
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