एक उम्मीद एक इंतजार By प्रशांत
इंतजार रहेगा मुझे तुम्हारा, मेरी बेचैनी का यूं ख़सारा तो नहीं होगा, तुम आओगे किसी दिन मुझे अपना समझकर, क्यूंकि जो राब्ता मेरा तुमसे है वो किसी ओर से तो नहीं होगा। आते है बहुत सारे लोग पर इन आंखों को बस इंतजार तुम्हारा रहता है, दिल कहता था दिल में रखो, मगर न कहने की बेचैनी कोई कब तक सहता है। तुम्हारे दिखने भर से सुकून का जो ठहराव आता है वो असाधारण है, मैं समंदर समेट के बैठा हूं अपने अंदर, तुम एक झील सी सुंदर हो साधारण हो। मुझे तुम्हारे पैरों की जंजीर नहीं, तुम्हारे पंख बनना है, जीवन तुम्हारे साथ खूबसूरत है मेरा, मुझे तुम्हारे साथ रहना है। मैंने रख तो दी है दिल की बात उनके सामने, तब से असहनीय बेचैनी हो रही है, दिल से मन और मन से दिल की गाड़ी उनकी यादों का समाना ढो़ रही है। तुम्हें देखा है मैंने कम बोलते हुए और बताती हो मैं बहुत बोलती हूं, तो फिर ये शांति किस लिए क्यूँ मेरे सामने मन के धागे नहीं खोलती हो। तुम्हारी आँखें झील सी मुख पे मुस्कान तुम मेरे लिए भगवान के वरदान सी प्रिय हो, तुम्हें पूरा हक है ये जानने का तुम मुझे मेरे माता पिता सी प्रिय हो।
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