अनकही बातें By प्रशांत
दिन भर की थकान के बाद आने वाली नींद हो तुम, सर्दियों भरी रात में सुकून भरी गर्माहट हो तुम, वैसे तो हैं आसमान में लाखों सितारे, पर मेरे आसमान का चांद हो तुम। मैं क्यूँ चाहूंगा तुम्हें बांध के रखना, मैं तो तुम्हारे लिए ये सारा आसमान खरीदना चाहता हूं, यूं रूठना मनाना लाज़मी है तुम्हारा, मैं तुम्हें बिना संघर्ष पाना भी नहीं चाहता हूं। तुम इस दुनिया में मुझे सबसे खूबसूरत लगती हो, मैं तुम्हें अपने हाथों से संवारना चाहता हूं। हर दिन तुम्हारे साथ खूबसूरत है मेरा, मैं तुम्हें हमेशा अपने दिल में रखना चाहता हूं। तुम जब बोलती हो रुकना, तुम्हारे बस इतना बोलने से सारी कायनात रुक सी जाती है, कोई कैसे न प्यार करे तुमसे, तुम्हारे आगे ये दुनियां फीकी पड़ जाती है। तुम्हारी बातों में है KitKat सी मिठास, तुम्हारी आंखों में है सबसे नशीली शराब, दिल चाहता है एक जगह ठहरना तुम्हारे साथ, मेरा घर, घर बनता है तुम्हारे आने के बाद। इश्क का पहला इ मोहब्बत का पहला म और प्यार की तो परिभाषा हो तुम, तुमसे शुरू होके तुमपर ही खत्म होने वाली मेरी दुनियां में सुकून की बरसात हो तुम।
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