पतझड़ और बसंत By प्रशांत
आज फिर दिल उदास बैठा है उनके दीदार को तलबगार बैठा है, वो कहते है अभी कोई वजह नहीं है आने की, समझाओ उनको वो वजह हैं हमारे मुस्कुराने की। सुबह उठने के बाद का पहला ख्याल हो तुम, शाम को सोने से पहले का सवाल हो तुम, तुम इश्क, मोहब्बत, प्यार और जूनून हो, इन सब बातों से इतर “तुम मेरा सुकून हो।” तुम मेरे दिल के हर कोने में हो, तुम मेरा घर बार हो, जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद तुम वो मेरा दिन इतवार हो। काश तुम मेरे शब्दों को समझ पाते, काश तुम मेरे प्यार की अनुभूति कर पाते, मेरी पहली और आखिरी पसंद हो तुम, मुझ जैसे पतझड़ के लिए बसंत हो तुम।
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