इश्क और तुम By प्रशांत
मैं पूछूं तुमसे कैसी हो, तो सच बताना, मन के भेद ना बता सको तो झूठी बातें ना बनाना। मैं पूछूंगा शाम को तुम्हारे गुजरे दिन के बारे में, तुम “आज पता है क्या हुआ” बोलके दिन भर की कहानी सुनना। मुझे चाहिए एक बक्से में बचपन के खिलौने तुम्हारे, फिर हम साथ में वो पल जिएंगे जो जो तुमने मेरे बिन गुजारे। तुम जब दिखते हो तो मुझे मेरे दिल की धड़कने कानों तक सुनाई पड़ती है, इंतजार में तुम्हारे ये घड़ी भी बहुत धीमा बढ़ती है। तुमसे मिलता हूं तो लगता है, तुम्हारे मिलने के बाद अब क्या ही चाहिए होगा, पर दिल में एक कश्मकश ये भी है जो मैं तुम्हारे लिए सोचता हूं क्या वो तुम्हारे दिल में भी आता होगा? बस इसी कश्मकश में बीत रही हैं आजकल मेरी दिन और रात, चाहे जैसे हो बस हो तुमसे बात।
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