जाने देना By प्रशांत
तुम्हें करीब से देखने के लिए आँखें बेचैन रहती थी, बेवजह बेचारी गुमसुम सी उदासी सहती थीं तुम दिखोगे किसी दिन बहुत करीब से, बस इसी ख्याल में सुबह खुलने की जल्दी में रहती थीं। अनजान रास्तों पर मिलने वाला हर शख्स अनजान ही होता है, लोग कहते हैं जिसे इश्क वो एकतरफा ही होता है। उम्मीद ए मोहब्बत तुमसे बेइंतहा थी मुझे, नफरत पर प्यार की हसरत थी मुझे, तुम गए तो ये अहसास हुआ मुझे, तुमसे मिलने वाले सबक की जरूरत थी मुझे। तुम्हारे कहने से मैं दूर हो गया तुमसे, तुम जो चाहो करो अब प्यार नहीं होगा तुमसे, यूं बीच रास्ते में छोड़कर अलविदा कहा मुझसे, दिल को यूं बंजर होने की उम्मीद नहीं थी तुमसे। अगर तुम समझ पाओ मेरे हृदय की पीड़ा तो तुम खुद को कभी माफ नहीं कर पाओगे, मोहब्बत करना तुम्हारे बस की बात नहीं, तुम कभी प्यार के लिए लड़ नहीं पाओगे। उसके साथ अपना बचपन जीने का मन करता था, ये चार लोग, ये समझदारी अब परे रख के खुलकर हंसने को मन करता था। मेरी उम्मीद, उसके दिल में भी मुझसे मिलने की ऐसी हो आस, वो मेरे साथ हर दिन ऐसे रहे जैसे कल न हो उसके पास। वो जब मुझे देखे तो उसे खुद में ओर मुझमें कोई फर्क न दिखे, मैं जब भी निहारूं उसे तो मुझसे ज्यादा मुझ जैसी वो दिखे। वो जिसके साथ अब अच्छा सा लगने लगता था, वो जिसके साथ एक जिंदगी और जीने का मन करता था, वो जिसके साथ फिर से बचपन जीने का मन करता था। शुक्रिया।
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