प्यार का आभास By प्रशांत
मैं चाहता हूं वो सिर्फ मुझे चुने, वो चुने मुझे मैं जैसा हूं, फ़िज़ूल बात न बनाए के ऐसा हूं, इश्क, मोहब्बत, प्यार ये सब पैर दबाते हैं उसके, वो बात करले मुझसे फिर पूछना मैं कैसा हूं। सुकून अपना रास्ता भूल जाए अगर वो न दिखे, चांद की चांदनी फीकी पड़ जाए अगर वो न दिखे, लोग कहते हैं पैसा ही सब कुछ है, मैं ठुकराता हूं ज़माने भर की दौलत अगर वो न दिखे। वो इतना प्यारा है कि उसकी नजर उतारने को जी चाहता है, उसके कहने से पहले उसकी सारी ख्वाहिशें पूरी करने को जी चाहता है, उसके लिए मैं खुद को कुर्बान कर दूं, वो इतना प्यारा है के बस गले लगाने को जी चाहता है। उसकी परछाईं से भी नूर की बरसात होती है, हवाएं महक जाती है जब उसकी बात होती है, उसके बोलने से फूल खिल उठते है, वो चुप हो जाए तो दिन में भी रात होती है। उसके दर्द में मुझे खुद के दर्द सा आभास हुआ, कुछ इस तरह मुझे अपने प्यार का विश्वास हुआ।
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