आज का नारीवाद By प्रशांत
महिलाएं ही क्यूं इज्जत की ठेकेदार बनें, क्यूं है घर की इज्जत उनके कंधों पर, और संपत्ति से क्यूं उन्हें दरकिनार करें। बात नारीवाद की करते हो, आदर्श झांसी की रानी को मानते हो, जब बात खुद के घर की महिलाओं पर आए तो क्यूं उन्हें चूल्हे से बांधते हो। तुमने देखा है हमेशा उन महिलाओं को जो सिर्फ श्रृंगार करती है, करते हो बस उनकी बातें जो अपने सौंदर्य की कहानियां गढ़ती है। कभी चलो मेरे साथ दिखाऊं तुम्हें, संघर्ष करती हुई स्त्रियां, श्रृंगार करती हुई स्त्रीयों से कितनी सुंदर लगती हैं, क्यूंकि वो इन सस्ते सौन्दर्य उत्पादों से नहीं खुद की मेहनत से खुद को महकाती हैं। धिक्कार है तुम्हारे ऐसे पुरुषत्व पर, जिस लड़की की तुमपे पड़े नजर वो मुस्कुरा के करे सिर ऊपर ओर निकले उसके मन का भय तब मानू तुम हो हमारी बेटियों के लिए अभय। खुद के चरित्र को अनुचित न होने दो, ना अपने बर्ताव को शासकीय, अपने मन मस्तिष्क से एक महिला को वस्तु ना समझें, ना उनके मुश्किल दिनों को नाटकीय। शुक्रिया 🙏🏻
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