तुम और तुमसे इश्क By प्रशांत
तुम और सिर्फ तुम्हारे लिए, आज मैं तुमसे प्यार और तुमसे तुम्हारी शिकायत लिखूंगा, आज मैं तुम्हारी तस्वीर से आने वाली खुशबू लिखूंगा। बेरंग सी मेरी जिंदगी थी तुम्हारे आने से पहले, मानो बस सांसे चल रही थी तुम्हारे आने से पहले, सवेरा क्या होता था मुझे नहीं पता था तुमसे मिलने से पहले, बस रातों से वास्ता था तुमसे मिलने से पहले। बंजर पड़े इस दिल में तुम्हारा बसेरा हुआ, हाथ थामा तुमने मेरा तब मेरे घर सबेरा हुआ। तुम्हारी सांसों की खुशबू से सारे इत्र महक जाते हैं, हवाएं चलने लगती हैं, सितारे बहक जाते हैं, चांद तुम्हें देखने को बेताब हो जाए, मासूमियत तुम्हारी दिल में उतर जाए, आंखें तुम्हारी समंदर सा अहसास कराएं, इश्क़ में तुम्हारे हम बस मर ही जाएं। उसके सारे दर्द सह लूं मैं, वो बस मेरे साथ रह ले, Ego बहुत है मुझमें किसी की ऊंची आवाज ना सुनूं, पर उसकी मर्जी जो चाहें कह ले। मैं हिम्मत लिखूं तुम अपना हाथ समझना, मैं खुशबू लिखूं तुम अपनी सांसे समझना, मैं चांद लिखूं तुम अपनी बिंदी समझना,
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