Boarding school Artist
वो समय कुछ ऐसा था, ना थे हमारे पास कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, खिलौना, या गाड़ी। ना ही थी, पढ़ाई के अलावा कुछ करने की आज़ादी। बस था तो हाथ में एक पेंसिल, सामने रखा, खाली पन्नों से भरा एक किताब और इन पाबंदियों से दूर जाने का एक ख़्वाब। फिर एक दिन, खिड़की से दिखा, ख़ूबसूरत सा खुला आसमान, कहने लगा, इन पाबंदियों का है सिर्फ तेरे शरीर पे ज़ोर, इसका तेरे ख़्वाब पे कैसे है कोई रोक? उठा पेंसिल और रंग दे ये किताब... बना दे अपने ख़्वाबों का चित्र और तोड़ दे इस पाबंदियों की डोर। फिर जो पेंसिल उठाया... अब तक वो रुकी नहीं। ख़्वाब था पाबंदियों से दूर जाने का, और ये पाबंदियां ही बन गईं वजह मेरे चित्र बनाने की। 💗 ~khucarts
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