bewafai 🫠
वो जो कहते थे के हम एक हैं, आज फ़ासलों का हुनर दिखा गए, वफ़ा के नाम पर शुरू हुई थी जो कहानी, उसे बेवफ़ाई का मोड़ सिखा गए। मैंने तो अपनी पलकों पर सजाया था उनके हर एक ख़्वाब को, मगर वो उन्हीं ख़्वाबों की बस्ती में, किसी और का घर बसा गए। यकीन की दीवारें इतनी कच्ची होंगी, ये कभी सोचा न था हमने, वो तो सरे-बाज़ार मेरे भरोसे का, तमाशा सरेआम लगा गए। अब सँभलने की कोशिश है, मगर ज़ख्म इतने गहरे हैं, कि वो जाते-जाते मेरी रूह को भी, गहरी तन्हाई में सुला गए।
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